रायपुर, 9 मई 2025।
गरियाबंद जिले के सुदूर वनांचल मड़ेली में आज एक ऐतिहासिक क्षण उस समय आया जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 45 वर्षों से अधूरी पड़ी पीपरछेड़ी सिंचाई परियोजना को पूरा करने की घोषणा की। यह घोषणा न केवल एक पुराने वादे की पूर्णता है, बल्कि क्षेत्र के हजारों किसानों के सपनों की पुनर्स्थापना भी है।

यह परियोजना 1977 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य घुनघुट्टी नाला पर बांध बनाकर सिंचाई सुविधा प्रदान करना था। लेकिन 1980 में वन अधिनियम लागू होने के बाद, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने के कारण यह परियोजना अधूरी रह गई। इसके बाद, कई सरकारों ने इस परियोजना की ओर गंभीर कदम नहीं उठाए और किसानों की आशाएं धीरे-धीरे मुरझाने लगीं

अब, मुख्यमंत्री श्री साय ने इसे अपनी प्राथमिकता में लिया और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पर्यावरणीय स्वीकृति देकर इस परियोजना को नया जीवन दिया। मुख्यमंत्री ने सुशासन तिहार समाधान शिविर में इस बहुप्रतीक्षित स्वीकृति की घोषणा की, जिसे सुनकर उपस्थित जनसमूह खुशी से झूम उठा और पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा, “यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि किसानों के संघर्ष, प्रतीक्षा और उम्मीद की जीत है। यह सुशासन तिहार का असली अर्थ है – लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना।” इस निर्णय से न केवल क्षेत्र के किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी, बल्कि फसल उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा, जिससे क्षेत्र में समग्र विकास की नई धारा बहेगी।

यह परियोजना क्षेत्र में अर्थव्यवस्था के सुधार के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नई जान डालेगी, और इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पल के लिए मुख्यमंत्री श्री साय की सराहना की जा रही है।

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