रायपुर, 27 मई 2025
छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। दक्षिण बस्तर डिवीजन और पीएलजीए बटालियन नंबर 01 में सक्रिय 04 हार्डकोर नक्सलियों सहित कुल 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इन सभी नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना से प्रेरित होकर आत्मसमर्पण किया।

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘नक्सल सदस्य मुक्त ग्राम पंचायत अभियान’ के तहत यह आत्मसमर्पण कराया गया है। इस अभियान के तहत जिस ग्राम पंचायत से सभी नक्सली गतिविधियों को समाप्त कर दिया जाता है, उस पंचायत को सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि विकास कार्यों के लिए दी जाती है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों में 2 पुरुष नक्सलियों पर 8-8 लाख, 1 पुरुष और 1 महिला नक्सली पर 5-5 लाख, 6 पुरुष नक्सलियों पर 2-2 लाख और 1 पुरुष नक्सली पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस प्रकार कुल 39 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा, “नक्सल समस्या केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी है। हमारी सरकार इस समस्या को समग्र दृष्टिकोण से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने आगे कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा, रोजगार, और सामाजिक पुनर्स्थापना की सुविधा दी जाएगी ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार स्थापित किए जा रहे नवीन सुरक्षा कैंपों और पुलिस की बढ़ती उपस्थिति से भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास का वातावरण बना है, जिससे नक्सली अब हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने को तैयार हो रहे हैं।

इस बड़ी सफलता से राज्य सरकार के नक्सल विरोधी अभियान को और बल मिलेगा और यह संकेत भी स्पष्ट हो गया है कि विकास और विश्वास की नीति के सहारे छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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