बस्तर, छत्तीसगढ़ – 12 जुलाई 2025:
कांगर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित एक छोटा सा जनजातीय गांव धुधमारास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) द्वारा इसे दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। इसके साथ ही यह गांव पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का आदर्श बनकर उभरा है।

प्राकृतिक सुंदरता और परंपराओं के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर

धुधमारास न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब यह गांव सौर ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय सुविधाओं के विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA) द्वारा गांव में शुद्ध पेयजल, रात्रि प्रकाश व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

सौर ऊर्जा परियोजनाओं से रोशन हुआ धुधमारास

  • गांव में 3 सोलर ड्यूल पंप लगाकर शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
  • 2 सोलर हाई मास्ट लाइट्स के जरिए रात में रोशनी का इंतजाम हुआ।
  • गांव की गलियों में सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाई गईं।
  • प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

इन सभी कार्यों की सतत निगरानी CREDA के अध्यक्ष भूपेन्द्र सावनानी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश राणा द्वारा की गई, जिससे कार्य की गुणवत्ता बनी रही।

पर्यटन को नया आयाम

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा धुधमारास और चित्रकोट गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों के रूप में सम्मानित किया गया। कांगर नदी की रमणीय धारा, हरियाली, जैव विविधता और बस्तरिया संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती है।

मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ट्रेकिंग ट्रेल्स, कैंपिंग साइट्स, और होम स्टे सुविधाओं का निर्माण कर रही है। स्थानीय हस्तशिल्प को बाज़ार से जोड़ने और सड़क व परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

रोमांचक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार

गांव की इको-टूरिज्म विकास समिति द्वारा कांगर नदी में कयाकिंग और बांस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
पर्यटकों के लिए वेटिंग रूम, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। राज्य का वन एवं पर्यटन विभाग योजनाबद्ध तरीके से धुधमारास को एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर रहा है। साथ ही नगालसर और नेतानार जैसे गांवों में भी इसी तरह की गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।

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