रायपुर, 16 जुलाई 2025 (पीटीआई):
छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को भारतीय सेना द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सशस्त्र बलों को बधाई देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि, यह प्रस्ताव कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति में पारित हुआ, क्योंकि उन्होंने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
7 मई 2025 को भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। यह बताया गया कि आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछकर हत्या की थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।

सदन में प्रस्ताव और सराहना
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा:

“यह सदन भारतीय सेना की अदम्य साहस और पराक्रम तथा देश के सफल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक दूरदर्शिता की सराहना करता है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करना एक ऐतिहासिक कदम था।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब देता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जो देश को छेड़ेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी चर्चा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय सेना की प्रशंसा की और कहा कि यह ऑपरेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति मजबूत संकल्प का प्रतीक है।

कांग्रेस का वाकआउट
जैसे ही वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रस्ताव पर बोलना शुरू किया, कांग्रेस विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया
विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा:

“कांग्रेस भारतीय सेना की बहादुरी को सलाम करती है, लेकिन जिस तरह से चर्चा शुरू हुई, वह कांग्रेस को जानबूझकर निशाना बनाने के उद्देश्य से थी।”

महंत ने कहा कि वे प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने के लिए सदन में उपस्थित थे, लेकिन भाजपा सदस्यों की बातों का उद्देश्य केवल कांग्रेस को उकसाना था।


निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना का प्रस्ताव एक ओर जहां राष्ट्रवादी भावना को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह सदन में राजनीतिक टकराव का कारण भी बना। कांग्रेस के वाकआउट ने इस चर्चा को और अधिक विवादास्पद बना दिया है।

इस तरह के मुद्दे जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और वीरता से जुड़े होते हैं, वहां सभी दलों की सर्वसम्मति अपेक्षित होती है, ताकि सशस्त्र बलों के मनोबल को एकजुट राष्ट्र का समर्थन मिले।

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