बलरामपुर, 17 अगस्त 2025।
उत्तर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की दुर्गम पहाड़ियों पर बसे बचवर गांव का छोटा सा प्राथमिक स्कूल इस स्वतंत्रता दिवस पर उम्मीद की किरण बन गया। यहां सिर्फ 13 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके दो समर्पित शिक्षक पंकज एक्का और श्याम साई ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर चार घंटे पैदल चलकर स्कूल पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बच्चों के बीच मिठाई बांटकर जश्न मनाया।

कठिन राह, अटूट जज़्बा

यह स्कूल खड़िया डमर पंचायत के तहत आता है। यहां तक पहुंचने के लिए शिक्षकों को रोज़ाना घने जंगलों से गुजरना पड़ता है, एक नदी पार करनी पड़ती है और पगडंडियों से होकर चढ़ाई करनी होती है। बाहर के लोग जहां तीन घंटे में पहुंचते हैं, वहीं दोनों शिक्षक अब इसे महज़ दो घंटे में तय कर लेते हैं।
गांव में 20–25 घर हैं, कोई किराना दुकान तक नहीं है। मिठाइयाँ और झंडा समारोह का सामान भी शिक्षक अपनी पीठ पर ढोकर लाते हैं।

बच्चों के लिए पर्व का महत्व

पंकज एक्का, जिन्हें 2010 में यहां पहली पोस्टिंग मिली थी, आज भी इसी स्कूल से जुड़े हुए हैं। वे कहते हैं — “हम चाहते हैं कि इन बच्चों को भी वही गर्व और खुशी मिले जो शहरों के बच्चे राष्ट्रीय पर्व पर महसूस करते हैं। रास्ता मुश्किल है लेकिन अब यह हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है।”

15 अगस्त को जैसे ही तिरंगा पहाड़ी की ऊंचाई पर लहराया, पूरा आंगन एक छोटे से उत्सव स्थल में बदल गया। बच्चे हंसी-खुशी मिठाइयाँ खाते रहे और शिक्षकों ने उन्हें देशभक्ति और शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया।

शिक्षा अधिकारी ने सराहा

जिला शिक्षा अधिकारी डी. एन. मिश्रा ने कहा, “यह बेहद प्रेरक पहल है। मैंने सभी शिक्षकों से अपील की है कि चाहे स्कूल कितने भी दूर हों, वे राष्ट्रीय पर्व ज़रूर मनाएँ।”

संदेश

जहां कुछ जगहों पर शिक्षकों की लापरवाही की खबरें आती हैं, वहीं बचवर गांव का यह स्कूल साबित करता है कि सच्ची निष्ठा और समर्पण से शिक्षा और देशभक्ति दोनों को जिया जा सकता है।

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