पबिलासपुर,19 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ में शहर बस सेवा की दुर्दशा को लेकर दाखिल स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने परिवहन सचिव-सह-परिवहन आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

दरअसल, 22 जुलाई 2025 को परिवहन आयुक्त ने हलफनामा दाखिल कर बताया था कि छह में से पांच सिटी बसें चालू हो चुकी हैं और एक बस जल्द शुरू होगी। लेकिन ‘बिलासपुर भास्कर’ में प्रकाशित खबर ने इस दावे की पोल खोल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, जो बस सेवा कोर्ट की सख्ती के बाद कुछ दिनों के लिए शुरू हुई थी, वह दोबारा बंद हो गई।

जनता की परेशानियां
कोर्ट ने कहा कि पिछले दस वर्षों से शहर बसें 30 किलोमीटर के दायरे में लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा रही हैं। तखतपुर, कोटा, खुंटाघाट और बिल्हा जैसे रूट पर पुरानी बसें किसी तरह चल रही थीं, लेकिन अब वे भी खराब हो चुकी हैं। कोरोना काल के दौरान छोटे स्टेशनों पर ट्रेनों के न रुकने से लोगों के लिए शहर बस ही एकमात्र सहारा थी। लेकिन अब पिछले कई दिनों से बस सेवा बंद होने से आम लोग बेहद परेशान हैं।

बसें कब तक नहीं चलेंगी?
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं और अब मरम्मत योग्य नहीं हैं। सवाल यह है कि आखिर लोग और कितने दिन बिना बस सेवा के गुजारा करेंगे। खबरों के मुताबिक, दिवाली के बाद नई ई-बसें शुरू होने की संभावना जताई गई है।

कोर्ट का कड़ा रुख
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब बसें खराब हो चुकी थीं, तो अधिकारी ने झूठा हलफनामा क्यों दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि परिवहन आयुक्त 14 अगस्त 2025 को कोर्ट में हाजिर होकर बताएं कि उन्होंने भ्रामक जानकारी क्यों दी और क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए।

यह मामला अब सिर्फ परिवहन व्यवस्था का नहीं बल्कि सरकारी जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

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