रायगढ़, 27 अगस्त 2025।
रायगढ़ की सांस्कृतिक धरती एक बार फिर शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोककला के रंगों से सराबोर हो गई है। बुधवार को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर 40वें चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह को नमन करते हुए कहा कि यह समारोह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ घराने की छाप देश ही नहीं, पूरी दुनिया में दिखाई देती है। राजा चक्रधर सिंह ने कथक को नई ऊँचाइयाँ दीं और अपनी रचनाओं के माध्यम से संगीत व नृत्य को एक नई दिशा दी। उन्होंने रायगढ़ को भारतीय कला का ऐसा केंद्र बताया, जहाँ कभी बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई, हरिप्रसाद चौरसिया की बाँसुरी और पं. जसराज के स्वर गूंजते रहे।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। उन्होंने कहा कि जब कथक में केवल जयपुर और बनारस घराने का नाम था, तब राजा चक्रधर सिंह ने रायगढ़ घराने की स्थापना कर भारतीय संस्कृति को नई पहचान दी। शेखावत ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ की नयी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि चक्रधर समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सरकार ठोस प्रयास कर रही है। वहीं, सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि एक गोंड आदिवासी राजा द्वारा कथक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचाना अपने आप में गौरव की बात है।

आगामी दस दिनों तक चलने वाले इस समारोह में देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से रायगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को और भव्य बनाएँगे। मंच पर शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोककला के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद कमलेश जांगड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, नगर निगम महापौर जीववर्धन चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और दर्शक उपस्थित रहे।

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