रायपुर, 28 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को एक अभिनव कदम उठाते हुए राज्य की सभी ग्राम पंचायतों के लिए क्यूआर कोड लॉन्च किए। अब ग्रामीण अपने पंचायत भवन या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे इन क्यूआर कोड को स्कैन कर पिछले तीन वर्षों में मनरेगा (MGNREGA) के तहत हुए कार्यों और उन पर हुए खर्च की पूरी जानकारी तुरंत हासिल कर सकेंगे।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा— “हम चाहते हैं कि हर ग्रामीण यह जान सके कि उनके गाँव में मनरेगा से क्या काम हुए और उस पर कितना खर्च हुआ। क्यूआर कोड योजना की प्रगति को वास्तविक समय में दिखाने वाली खिड़की की तरह होंगे।”

इसके साथ ही राज्य सरकार ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित योजना निर्माण भी शुरू किया है। ‘युक्तिधारा पोर्टल’ के माध्यम से सैटेलाइट आधारित मैपिंग की जा रही है, ताकि श्रम बजट और कार्य योजनाएँ अधिक सटीक बन सकें। अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर में ग्राम सभाओं से स्वीकृति के बाद इन योजनाओं को पंचायत दीवारों पर भी अंकित किया जाएगा, ताकि किसी को भी स्वीकृत कार्यों की जानकारी से अंजान न रहना पड़े।

गाँवों में यह पहल उत्साह का कारण बनी है। कई ग्रामीणों का कहना है कि पहले उन्हें यह नहीं पता चलता था कि किस काम पर कितना पैसा खर्च हुआ। अब वे खुद अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर देख सकेंगे कि उनके गाँव का पैसा कहाँ और कैसे खर्च हुआ।

मनरेगा लंबे समय से ग्रामीणों के लिए आजीविका का अहम साधन रहा है। लेकिन योजनाओं से जुड़ी जानकारी की पारदर्शिता हमेशा एक चुनौती रही है। इस नई व्यवस्था से ग्रामीणों को न सिर्फ भरोसा मिलेगा बल्कि यह सुनिश्चित होगा कि योजनाएँ सही तरीके से ज़मीन पर उतरें।

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