भिलाई, 9 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी विभागों में अधिकारियों-कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापसी कर संलग्नीकरण प्रथा समाप्त करने का निर्णय लिया था। लेकिन तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) भिलाई में यह प्रथा अब भी गहरी पकड़ बनाए हुए है।

मामला 2021 का है, जब इंजीनियरिंग कॉलेज लखनपुर, अंबिकापुर से पति-पत्नी को परिवारवाद के चलते बिना शासन की अनुमति के भिलाई स्थित विश्वविद्यालय में संलग्न किया गया। नियम के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र से किसी भी शासकीय सेवक के संलग्नीकरण के लिए शासन की अनुमति आवश्यक होती है, लेकिन उस समय तत्कालीन कुलसचिव ने अपनी बेटी और दामाद को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी कर दी।

स्थानीय लोगों और अंबिकापुर क्षेत्र के नागरिकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए शिकायतें दर्ज कराईं। जांच में परिवारवाद की पुष्टि भी हुई। शासन ने पत्र जारी कर पति-पत्नी को उनके मूल पदस्थापना स्थल में लौटने के निर्देश दिए, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

सबसे बड़ा विवाद तब पैदा हुआ जब तत्कालीन कुलसचिव ने अपने दामाद, जो सहायक प्राध्यापक थे, को कुलसचिव की कुर्सी सौंप दी और खुद कार्यमुक्त होकर सेवानिवृत्त हो गए। नतीजा यह हुआ कि नियमित प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर को एक सहायक प्राध्यापक के अधीन काम करना पड़ा।

यूटीडी में 2022 और 2023 में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति हो चुकी है, इसके बावजूद नियमित कुलसचिव की नियुक्ति आज तक नहीं हो सकी। जबकि 18 अगस्त को राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने नियमित कुलपति की नियुक्ति कर दी है। विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार कुलसचिव का पद नियमित रूप से भरा जाना आवश्यक है, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह पद रिक्त पड़ा है।

नियमित और अनुभवी कुलसचिव की अनुपस्थिति का खामियाजा सीधे छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। आय दिन होने वाले छात्र आंदोलनों से स्पष्ट है कि युवाओं का धैर्य जवाब दे रहा है। छात्रों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने की बजाय शासन-प्रशासन परिवारवाद और जुगाड़ तंत्र को बढ़ावा दे रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि शिक्षा जगत के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

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