08 अक्टूबर 2025 कांकेर। शहर के बीचोंबीच स्थित शासकीय नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का ऐतिहासिक खेल मैदान अब अपनी पहचान खोता जा रहा है। कभी जहां सुबह-शाम खिलाड़ी क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल की प्रैक्टिस किया करते थे, आज वही Kanker Narhardev school ground मवेशियों का ठिकाना बन चुका है।

मैदान में अब खेल की जगह गोबर, गंदगी और दुर्गंध ने ले ली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर दिन सैकड़ों मवेशी यहां जमा होकर मैदान को पूरी तरह खराब कर रहे हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है, बल्कि मॉर्निंग वॉक करने वाले लोग भी परेशान हैं।


🏏 खेल का मैदान बना गौठान

कांकेर का यह मैदान शहर का सबसे पुराना और बड़ा खेल मैदान माना जाता है।
यहां कभी जिला स्तरीय टूर्नामेंट और विद्यालयीन प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं।
लेकिन अब मैदान में नालियों का पानी जमा है, दुर्गंध फैली हुई है और मवेशियों के झुंड हर जगह नजर आते हैं।

एक स्थानीय नागरिक ने बताया —

“पहले बच्चे यहीं सुबह दौड़ लगाते थे, अब मैदान में उतरना भी मुश्किल हो गया है।”

खिलाड़ियों का कहना है कि गंदगी और खुले में घूमते जानवरों के कारण अभ्यास पूरी तरह ठप हो चुका है।


🚧 सड़क और मैदान दोनों पर खतरा

लोगों ने बताया कि मवेशी कभी मैदान में और कभी सड़कों पर घूमते रहते हैं।
इससे न सिर्फ यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
खिलाड़ी और अभिभावक प्रशासन से नाराज हैं कि महीनों से शिकायत करने के बाद भी नगर पालिका या जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।


📣 जनता की मांग

नागरिकों की मांग है कि जो लोग अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही Kanker Narhardev school ground की तत्काल सफाई कर इसे खिलाड़ियों और नागरिकों के लिए दोबारा खोलने की मांग की जा रही है।

स्थानीय खेल प्रशिक्षकों का कहना है —

“अगर मैदान ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो हमारे खिलाड़ियों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?”

विशेषज्ञों का मानना है कि कांकेर जैसे उभरते शहरों में खेल संस्कृति को बचाने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए।

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