Musrputta village air travel initiative। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के मुसुरपुट्टा गांव ने शिक्षा को प्रोत्साहित करने की एक मिसाल पेश की है। यहां अगर कोई छात्र 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करता है, तो उसे हवाई जहाज से देश के प्रसिद्ध स्थलों की सैर कराई जाती है।

गांव की अनोखी परंपरा बनी प्रेरणा

कांकेर से लगभग 35 किलोमीटर दूर बसे मुसुरपुट्टा गांव ने यह परंपरा वर्ष 2013 में शुरू की थी। शुरुआत में बच्चों को दिवाली पर साइकिल, किताबें और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता था। बाद में गांव के अधिकारी-कर्मचारियों ने “अधिकारी कर्मचारी प्रकोष्ठ” बनाया, जो अब इन हवाई यात्राओं का पूरा खर्च उठाता है।

शिक्षा के लिए ‘हवाई यात्रा’ बनी नई प्रेरणा

गांव के शिक्षक डी.के. भास्कर बताते हैं कि यह पहल बच्चों में पढ़ाई की रुचि बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने के लिए शुरू की गई थी।

“हमारे क्षेत्र के बच्चों ने पहले कभी हवाई जहाज नहीं देखा था। अब वे न सिर्फ उड़ान भर रहे हैं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की चाह भी रख रहे हैं,” — डी.के. भास्कर।

अब तक करीब 50 छात्रों को हवाई यात्रा का अवसर मिल चुका है। हर साल दो से तीन बच्चों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयनित किया जाता है।

बच्चों की उड़ान – सपनों से आसमान तक

साल 2025 में 10वीं में 90% अंक लाने वाले छात्र डेविड साहू और तोषण कुमार साहू को रायपुर से भुवनेश्वर की हवाई यात्रा कराई गई। उन्होंने पुरी, कोणार्क मंदिर, जगन्नाथ मंदिर और चिल्का झील जैसी जगहों का भ्रमण किया।
तोषण ने मुस्कुराते हुए कहा —

“पहले पढ़ाई बोझ लगती थी, अब मज़े की लगती है। अब लक्ष्य राज्य की मेरिट लिस्ट में आना है, ताकि विदेश यात्रा का मौका मिले।”

गांव में शिक्षा का स्तर बढ़ा

शिक्षक के अनुसार, पहले गांव का औसत परिणाम 60–70 प्रतिशत था, लेकिन अब छात्र 90% से अधिक अंक ला रहे हैं। कई छात्र राज्य की मेरिट सूची में भी शामिल हो चुके हैं।

“अगर हमारे छात्र राज्य की टॉप लिस्ट में आएंगे, तो हम उन्हें सिंगापुर की यात्रा कराएंगे,” — डी.के. भास्कर।

नक्सल क्षेत्र से निकली उम्मीद की उड़ान

मुसुरपुट्टा गांव की यह Musrputta village air travel initiative इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज एकजुट होकर शिक्षा को प्राथमिकता दे, तो किसी भी कठिन क्षेत्र में बदलाव संभव है।
यह पहल अब पूरे बस्तर संभाग और राज्य के अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी है।

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