रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर इलाके से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां बीते 20 महीनों में कुल 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (Bastar Naxal surrender) किया है। यह जानकारी बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने दी। आत्मसमर्पण करने वालों में कई कुख्यात नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपये के इनाम थे।

🔫 कांकेर और सुकमा में 127 नक्सलियों ने डाले हथियार

शनिवार को बस्तर के कांकेर और सुकमा जिलों में 127 माओवादियों ने हथियार डाल दिए। इनमें कांकेर के 100 और सुकमा के 27 नक्सली शामिल हैं। सभी अलग-अलग स्तरों पर नक्सली संगठनों में सक्रिय थे और वर्षों से पुलिस और सुरक्षा बलों के रडार पर थे।

आईजी सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को बसों के जरिए BSF कैंप तक लाया गया, जहां उन्होंने अपने हथियार सौंपे। इसके बाद उनसे नियमों के अनुसार पूछताछ की गई और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

🌱 “यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बदलाव की कहानी है”

आईजी सुंदरराज पी. ने कहा, “यह सरेंडर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि सरकार की विकास और विश्वास की नीति अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है। पहले जहां नक्सली डर और बंदूक के सहारे शासन चलाने की कोशिश करते थे, वहीं अब गांवों में सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र खुलने लगे हैं। लोग अब मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

👩‍🦰 महिला नक्सलियों ने भी किया सरेंडर

आत्मसमर्पण करने वालों में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो लंबे समय से भूमिगत थीं। इनमें से कुछ पर 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इनाम घोषित थे। पुलिस ने बताया कि इन्हें सामाजिक पुनर्वास योजनाओं के तहत लाभ देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

🚔 नक्सल नेटवर्क हो रहा कमजोर

कांकेर और सुकमा में सरेंडर करने वाले कई नक्सली पुलिस कैंप पर हमले, सड़क निर्माण में बाधा और ग्रामीणों को डराने जैसी वारदातों में शामिल रहे हैं। बस्तर पुलिस का कहना है कि संगठन का जनाधार अब तेजी से कमजोर हो रहा है।

सुरक्षा बलों के लगातार सर्च ऑपरेशन और स्थानीय प्रशासन के भरोसेमंद रवैये के कारण लोग अब नक्सलवाद से दूरी बना रहे हैं।

💬 बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा है

आईजी सुंदरराज पी. ने कहा, “बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा बढ़ा है। जो कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमते थे, वे अब अपने बच्चों के भविष्य की बात कर रहे हैं। यह बदलाव सुरक्षा बलों, प्रशासन और स्थानीय जनता के संयुक्त प्रयास से संभव हुआ है।”

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