Bastar Naxal surrender Chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर से देश के लिए एक ऐतिहासिक खबर आई है। लंबे समय से नक्सल हिंसा की छाया में रहे इस क्षेत्र में अब शांति और विश्वास की नई सुबह उभर रही है। शुक्रवार को बस्तर संभाग कैडर के 210 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़े आत्मसमर्पण पर खुशी जताते हुए कहा, “बस्तर कभी माओवादी आतंक का गढ़ हुआ करता था, लेकिन आज वही बस्तर खेल, विकास और विश्वास की नई पहचान बन चुका है। इस बार माओवादी-मुक्त बस्तर में दिवाली की रौनक कुछ और होगी।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह दिन न केवल बस्तर बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम ‘पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत आयोजित किया गया। आत्मसमर्पित नक्सलियों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य और कई वरिष्ठ माओवादी कैडर शामिल हैं। उन्होंने कुल 153 अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG जैसे हथियार शामिल हैं।

यह सिर्फ हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही हिंसा, भय और अलगाव की मानसिकता से शांति और विकास की ओर कदम बढ़ाने की घोषणा है।

मुख्यधारा में लौटने वाले शीर्ष माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू और आरसीएम रतन एलम जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने की शपथ ली।

जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुए इस आयोजन में आत्मसमर्पित नक्सलियों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और लाल गुलाब भेंट कर नए जीवन की शुभकामनाएं दी गईं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह अब तक का देश का सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण है। यह न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि विकास और विश्वास की नीति से हिंसा की जड़ों को समाप्त किया जा सकता है।

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