भिलाई।
छत्तीसगढ़ के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है।
छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, पूर्व कुलसचिव और कुलसचिव की बेटी को पद का दुरुपयोग और मनमानी करने का दोषी पाया है। आयोग ने राज्य के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा सचिव को तीनों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।


🧾 कोरबा निवासी की शिकायत पर लोक आयोग ने की कार्रवाई

यह मामला कोरबा निवासी जितेन्द्र साहू की ओर से दर्ज की गई शिकायत पर आधारित है। उन्होंने लोक आयोग के समक्ष आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय के अंदर परिवारवाद, पक्षपात और नियमों की अनदेखी कर पदों का दुरुपयोग किया गया।
आयोग ने शिकायत की गहन जांच की और लंबी सुनवाई के बाद आरोपों को सही पाया


🧑‍⚖️ पिता कुलसचिव, बेटी प्रभारी अधिकारी और मामा कुलपति — पारिवारिक ‘खेला’ उजागर

जांच में यह सामने आया कि कुलसचिव ने अपनी बेटी को विश्वविद्यालय में प्रभारी अधिकारी के पद पर पदस्थ किया था। वहीं, उस समय कुलपति स्वयं उनका सगा रिश्तेदार (मामा) था।
तीनों ने मिलकर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक निर्णयों को अपने हित में मोड़ने का प्रयास किया। आयोग ने इस पूरे “पारिवारिक खेल” को हितों के टकराव (conflict of interest) का गंभीर उदाहरण माना।


⚖️ लोक आयोग ने ठहराया दोषी, कार्रवाई के निर्देश जारी

लोक आयोग के अध्यक्ष ने सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया कि तीनों अधिकारियों ने पद की शक्ति का दुरुपयोग किया है।
इसलिए राज्य सरकार के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए कि वे दोषियों पर शासनिक और कानूनी कार्रवाई करें।


🏛️ पूर्व कुलसचिव ने हाईकोर्ट में ली शरण, आदेश पर मिली अस्थायी राहत

लोक आयोग के आदेश के बाद पूर्व कुलसचिव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आयोग के निर्णय को चुनौती दी है।
हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई में आयोग के आदेश पर एक माह की अंतरिम स्थगन (stay) दे दी है।


📚 CSVTU में पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर राज्य के तकनीकी विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता और नैतिकता पर गहरा असर पड़ेगा।

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