रायपुर, 15 नवंबर 2025 — छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि निर्धारण और उपयोग परिवर्तन को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। राजस्व विभाग ने 13 बिंदुओं में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए नगर निगम क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नई भूमि दरें तय की हैं। इस आदेश को जमीन से जुड़े लंबे समय के विवादों और प्रक्रियात्मक देरी को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि उपयोग से जुड़े बदलाव लगातार बढ़ रहे थे। कई मामलों में दरों और प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती थी, जिससे आम लोगों और निवेशकों दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था।


कृषि भूमि को अब आसानी से किया जा सकेगा डायवर्ट

नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि यदि कोई व्यक्ति कृषि भूमि को आवासीय या औद्योगिक उपयोग के लिए डायवर्ट करता है, तो अब वह राजस्व संहिता की धारा 258 की उपधारा के तहत पुनः भूमि निर्धारण करा सकेगा

यह बदलाव ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और छोटे भूमि स्वामियों के लिए राहत लेकर आया है। डायवर्सन की प्रक्रिया पहले लंबी और जटिल मानी जाती थी, लेकिन अब इसे सरल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

ग्रामेश्वर नामक एक किसान ने बताया, “पहले डायवर्शन कराना काफी मुश्किल होता था। अब सरकार ने नियम स्पष्ट किए हैं तो हमें उम्मीद है कि काम जल्दी और बिना दिक्कत के होगा।”


प्रीमियम दरों में भी संशोधन

सरकार ने प्रीमियम की दरों में संशोधन करते हुए इसे वर्तमान आर्थिक माहौल और भूमि की वास्तविक उपयोगिता के हिसाब से अपडेट किया है।

इसके साथ ही राजस्व विभाग ने सभी कलेक्टरों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे पूरे प्रदेश में प्रक्रियाओं में एकरूपता आएगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।


प्रदेश में भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार का यह निर्णय भूमि संबंधी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और लंबित मामलों को निपटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम औद्योगिक विकास, शहरी विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजनाओं को गति दे सकता है।

Leave a Reply

Trending

Discover more from Aaj Ki Janta

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading