Vinod Kumar Shukla death: हिंदी साहित्य जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार 2024 से सम्मानित प्रख्यात कवि-लेखक विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को रायपुर में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। पिछले कई दिनों से उनका इलाज AIIMS रायपुर में चल रहा था।

AIIMS के प्रवक्ता डॉ. लक्ष्मीकांत चौधरी के अनुसार, शाम 4:58 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। अस्पताल की मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, उनकी मृत्यु का कारण मल्टीपल ऑर्गन इन्फेक्शन और ऑर्गन फेल्योर रहा।


गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे विनोद कुमार शुक्ल

डॉक्टरों के अनुसार, विनोद कुमार शुक्ल इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) जैसी गंभीर श्वसन बीमारी से पीड़ित थे।
इसके अलावा उन्हें—

  • टाइप-2 डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • गंभीर निमोनिया
  • प्ल्यूरल इफ्यूजन
  • सिस्टमेटिक इन्फेक्शन
  • ओरल कैंडिडायसिस

जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा—

“प्रसिद्ध लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के निधन से अत्यंत दुखी हूं। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को सदैव याद किया जाएगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”

गौरतलब है कि पिछले महीने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान पीएम मोदी ने स्वयं विनोद कुमार शुक्ल से फोन पर बात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी।


छत्तीसगढ़ के गौरव थे विनोद कुमार शुक्ल

1937 में राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल ने 1971 में अपने पहले कविता संग्रह ‘लगभग जय हिंद’ से साहित्यिक यात्रा शुरू की।

उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं—

  • कविता से लंबी कविता
  • दीवार में एक खिड़की रहती थी
  • नौकर की कमीज

उनका उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ इतना प्रभावशाली रहा कि उस पर फिल्म भी बनी।
साधारण जीवन को गहरी संवेदना और मानवीय गरिमा के साथ प्रस्तुत करना उनकी लेखनी की सबसे बड़ी पहचान रही।


पहले छत्तीसगढ़ी लेखक जिन्हें मिला ज्ञानपीठ

विनोद कुमार शुक्ल को इससे पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मान मिल चुके थे।
लेकिन वर्ष 2024 में मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला लेखक बनाता है, जिसे भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान प्राप्त हुआ।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा – अपूरणीय क्षति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक संदेश में लिखा—

“विनोद जी ने ‘नौकर की कमीज’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसी रचनाओं के माध्यम से साधारण जीवन को असाधारण गरिमा दी। वे छत्तीसगढ़ का गौरव थे। उनकी संवेदनशील रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। ओम शांति।”

बाद में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि विनोद कुमार शुक्ल का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।


भूपेश बघेल ने राज्य शोक की मांग की

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी गहरा दुख जताते हुए राज्य सरकार से राजकीय शोक घोषित करने और कुछ दिनों तक सभी उत्सव स्थगित करने की अपील की।


हिंदी साहित्य में सदा जीवित रहेंगे विनोद कुमार शुक्ल

विनोद कुमार शुक्ल की लेखनी कभी शोर नहीं करती थी, लेकिन वह सीधे मन को छूती थी
उनका जाना सिर्फ एक लेखक का जाना नहीं, बल्कि संवेदनशील हिंदी भाषा की एक पीढ़ी का मौन हो जाना है

हिंदी साहित्य उन्हें हमेशा याद रखेगा।

विनम्र श्रद्धांजलि।

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