coal mining protest violence: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कोयला खनन परियोजना के खिलाफ चल रहा आंदोलन शनिवार को हिंसक रूप ले बैठा। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस सहित कई वाहन जला दिए गए

स्थिति तब और बिगड़ गई जब उग्र भीड़ ने जिंदल पावर लिमिटेड के कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) में घुसकर कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया।


🧩 कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

जिला प्रशासन के अनुसार, गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण बीते 12 दिसंबर से लिब्रा गांव के CHP चौक पर धरना दे रहे थे।
ग्रामीणों का विरोध 8 दिसंबर को धौराभाठा में आयोजित जनसुनवाई को लेकर है, जिसे वे नियमों के खिलाफ बता रहे हैं।


👥 भीड़ बढ़ी, हालात बिगड़े

शनिवार सुबह करीब 300 प्रदर्शनकारी मौके पर जुटे थे। कुछ लोगों द्वारा सड़क जाम करने की सूचना पर राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभालने की कोशिश की

हालांकि, दोपहर होते-होते आसपास के गांवों से लोग जुड़ते गए और भीड़ की संख्या करीब 1,000 तक पहुंच गई
लगातार लाउडस्पीकर से शांति की अपील के बावजूद, दोपहर करीब 2:30 बजे भीड़ बेकाबू हो गई


🚔 पुलिस पर हमला, वाहन फूंके गए

प्रशासन के अनुसार, उग्र भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पथराव व लाठी-डंडों से हमला किया।
इसमें—

  • एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा
  • तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम
  • एक पुलिस आरक्षक

गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों सहित कई जवानों को चोटें आईं

भीड़ ने इसके बाद—

  • पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस में आग लगा दी
  • कई अन्य सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त किया

🏭 जिंदल कंपनी के संयंत्र में आगजनी

हिंसा यहीं नहीं रुकी। प्रदर्शनकारी जिंदल पावर लिमिटेड के कोल हैंडलिंग प्लांट में जबरन घुस गए।
यहां—

  • कन्वेयर बेल्ट जलाई गई
  • दो ट्रैक्टर और अन्य वाहन फूंके गए
  • कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई

🧑‍⚖️ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कोशिशें नाकाम

स्थिति को संभालने के लिए—

  • लैलूंगा विधायक विद्या सिदार
  • रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी
  • एसपी दिव्यांग पटेल

मौके पर पहुंचे और भीड़ से संवाद की कोशिश की।
लेकिन इसके बावजूद फिर से पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।


🛑 प्रशासन का बयान: हालात नियंत्रण में

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदर्शन बीते 15 दिनों से शांतिपूर्ण था और प्रशासन सभी सुविधाएं दे रहा था।

उन्होंने कहा—

“शनिवार दोपहर कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया। इसके बाद हालात बिगड़े। भीड़ नेतृत्वविहीन थी और लगातार आक्रामक बनी रही।”

घायलों की हालत स्थिर बताई गई है, कुछ को बेहतर इलाज के लिए रायगढ़ भेजा गया है।


🎥 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें
एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करते हुए कुछ महिलाओं को देखा जा सकता है, जबकि कुछ लोग उन्हें बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।


🏛️ राजनीतिक प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य सरकार की जिद को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने आरोप लगाया कि—

“सरकार उद्योगपतियों के इशारे पर ग्रामीणों और आदिवासियों को उनकी जमीन और जंगल से बेदखल कर रही है। शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश ने हालात बिगाड़े।”


🔍 आगे क्या?

फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है
प्रशासन का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर संवाद बहाल करने की कोशिश की जा रही है

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि विकास और स्थानीय लोगों की सहमति के बीच संतुलन कैसे बने

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