Chhattisgarh High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार की अपील की अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह निर्णय 65 दिनों की अकारण देरी के आधार पर सुनाया।
डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु शामिल थे, ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी विभागों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है कि वे समयबद्ध और सतर्कता से अपने दायित्व निभाएं।


📄 किस मामले में दायर की गई थी याचिका

राज्य सरकार ने 30 जून 2025 को बेमेतरा सत्र न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी थी।
सत्र न्यायालय ने बेमेतरा निवासी 24 वर्षीय युवक को—

  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 109(1)
  • और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B) बी

के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया था।

इसी बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की अनुमति मांगी थी।


🕒 देरी को लेकर सरकार की दलील

राज्य सरकार की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट एस.एस. बघेल ने दलील दी कि अपील दायर करने में हुई देरी विभिन्न विभागीय औपचारिकताओं के कारण हुई।
उन्होंने बताया कि विधि और विधायी कार्य विभाग से प्रस्ताव भेजे जाने, फिर महाधिवक्ता कार्यालय में फाइल जाने और ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया में समय लग गया।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि बहु-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे के कारण ऐसी देरी होना असामान्य नहीं है।


⚖️ कोर्ट क्यों नहीं हुआ संतुष्ट

Chhattisgarh High Court News के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि—

“सीमा कानून (Limitation Law) सभी पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वह राज्य सरकार ही क्यों न हो।”

कोर्ट ने साफ कहा कि देरी माफ करना अपवाद है, नियम नहीं, और इसे सरकार कोई विशेषाधिकार समझकर दावा नहीं कर सकती।


🛑 देरी को बताया अस्पष्ट और असंतोषजनक

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देरी के लिए दिया गया कारण न तो ठोस है और न ही विशिष्ट।
कोर्ट के अनुसार, देरी का कारण उसी वैधानिक समय-सीमा के भीतर उत्पन्न होना चाहिए, न कि बाद की प्रशासनिक प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर पेश किया जाए।

इसी आधार पर याचिका को देरी और लाचेस (Delay and Laches) के चलते खारिज कर दिया गया।


यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि सरकार भी कानून के दायरे में है और समयसीमा का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।
Chhattisgarh High Court News के तहत यह निर्णय प्रशासनिक सुस्ती पर न्यायिक सख्ती का स्पष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

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