रायपुर, 03 जनवरी 2026 —
Lochan Prasad Pandey Jayanti: छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय लोचन प्रसाद पाण्डेय की जयंती (4 जनवरी) के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उनके उत्कृष्ट साहित्यिक अवदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पाण्डेय जी ने अपनी सशक्त और संवेदनशील लेखनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


✍️ बहुभाषी साहित्य साधना का अद्वितीय उदाहरण

Lochan Prasad Pandey Jayanti के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर जिले के बालपुर गांव में जन्मे स्वर्गीय लोचन प्रसाद पाण्डेय ने—

  • छत्तीसगढ़ी
  • हिन्दी
  • ओड़िया

भाषाओं में साहित्य सृजन कर बहुभाषी साहित्य साधना का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत किया।

उनकी रचनाओं में लोकजीवन, नैतिक मूल्य, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएँ अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं।


🌱 साहित्य के माध्यम से सामाजिक जागरण

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय पाण्डेय जी का साहित्य केवल शब्दों का सृजन नहीं था, बल्कि—

  • संयम
  • सदाचार
  • चरित्र निर्माण
  • सामाजिक जागरण

का सशक्त माध्यम रहा है।

उनकी रचनाएं समाज को दिशा देने वाली और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाली रही हैं।


🏆 ‘साहित्य वाचस्पति’ सम्मान से अलंकृत व्यक्तित्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘साहित्य वाचस्पति’ सम्मान से अलंकृत लोचन प्रसाद पाण्डेय का व्यक्तित्व और कृतित्व छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है।

उन्होंने यह भी कहा कि—

“छत्तीसगढ़ के साहित्यिक गौरव के रूप में लोचन प्रसाद पाण्डेय का नाम सदैव आदरपूर्वक स्मरण किया जाता रहेगा।”


Lochan Prasad Pandey Jayanti के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किया गया नमन इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ अपने साहित्यिक मनीषियों को कभी नहीं भूलता। स्वर्गीय पाण्डेय जी की साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

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