रायपुर।
Bailadila Mining Protest: छत्तीसगढ़ के डांटेवाड़ा जिले की बैलाडीला पहाड़ियों में एक बार फिर खनन के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। डिपॉजिट नंबर 4 में प्रस्तावित खनन और इसे निजी हाथों में सौंपने के कथित प्रयासों के विरोध में स्थानीय युवाओं ने नए सिरे से आंदोलन शुरू कर दिया है। इस जनआंदोलन को अब कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP) और CPI का भी समर्थन मिल गया है।


बाइक रैली से पहाड़ी तक पैदल मार्च

रविवार को दर्जनों युवाओं ने पहले बाइक रैली निकाली और इसके बाद कई किलोमीटर पैदल चढ़ाई कर पहाड़ी पर पहुंचे। वहां प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया और “जल-जंगल-जमीन बचाओ” के नारे लगाए। हाथों में तिरंगा लिए युवाओं ने साफ कहा कि उनका संघर्ष विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रकृति और भविष्य की रक्षा के लिए है।


“यह सिर्फ खदान नहीं, बस्तर के अस्तित्व की लड़ाई”

पहाड़ी पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए स्थानीय कांग्रेस नेता छविंद्र कर्मा ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक खनन पट्टे तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा,

“ये पहाड़ और जंगल बस्तर को जीवन देते हैं। हम डिपॉजिट नंबर 4 ही नहीं, बल्कि डिपॉजिट नंबर 13 तक खनन के खिलाफ संघर्ष करेंगे।”

उन्होंने ऐलान किया कि आंदोलन के अगले चरण में 26 जनवरी 2026 को प्रदर्शनकारी डिपॉजिट नंबर 13 तक मार्च करेंगे।


“बैलाडीला बस्तर का ऑक्सीजन बैंक है”

युवा नेता राहुल महाजन ने कहा कि बैलाडीला का इलाका दुर्लभ वन्य प्रजातियों का घर है और पूरे बस्तर के लिए प्राकृतिक ऑक्सीजन बैंक की तरह काम करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खनन का रास्ता साफ करने के लिए इस क्षेत्र को भैरमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से जानबूझकर बाहर रखा गया, जबकि कई वन्यजीव यहां नियमित रूप से विचरण करते हैं।

महाजन ने कहा,

“अगर खुदाई शुरू हुई तो जैव विविधता और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति होगी। यह लड़ाई अब रुकेगी नहीं।”


राजनीतिक और सामाजिक समर्थन बढ़ा

यह आंदोलन शुरुआत में युवाओं द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन अब इसे कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बैलाडीला की पहाड़ियां, नदियां और जंगल बस्तर की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रीढ़ हैं।


स्थिति पर पुलिस की नजर

प्रदर्शन के दौरान पुलिस दूर से हालात पर नजर बनाए हुए थी। शाम तक किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।


Bailadila Mining Protest अब केवल स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकार और टिकाऊ विकास से जुड़ा एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे बैलाडीला एक बार फिर विकास बनाम संरक्षण की बहस के केंद्र में आ गया है।

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