रायपुर, 07 जनवरी 2025/
Women Self Help Groups: आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव मानसिक मजबूती से तैयार होती है। जब इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास एक साथ जुड़ते हैं, तो बदलाव की कहानी खुद-ब-खुद लिखी जाती है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इसी सोच को साकार कर दिखाया है।

आज ये महिलाएं केवल अपनी आजीविका नहीं चला रहीं, बल्कि जिले की गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के बेहतर पोषण में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।


पोषण आहार निर्माण से दोहरी सशक्तता

रेडी-टू-ईट (RTE) पोषण आहार निर्माण संयंत्र सरकार की ऐसी पहल हैं, जहां महिला स्व-सहायता समूह सीधे तौर पर संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन संयंत्रों में गेहूं, दाल, दूध जैसे पोषक तत्वों से भरपूर सामग्री से आहार तैयार किया जाता है।
इससे एक ओर बच्चों और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।


नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार से बदली तस्वीर

सूरजपुर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरण के लिए रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण संयंत्र शुरू किए गए हैं।
यहां तैयार होने वाला नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार विटामिन A, D, आयरन, कैल्शियम, जिंक, फोलिक एसिड सहित कई आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त है।

इन आहारों का उद्देश्य बच्चों और माताओं के पोषण स्तर को मजबूत करना है, ताकि कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।


तीन संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत

जिला प्रशासन द्वारा कुल 7 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंड में 3 संयंत्रों का सफल संचालन हो रहा है, जहां 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से उत्पादन कार्य से जुड़ी हैं।

निर्मित पोषण आहार को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क वितरित किया जा रहा है।


430 महिलाएं वितरण व्यवस्था की रीढ़

भैयाथान विकासखंड में 15 और प्रतापपुर में 13 स्व-सहायता समूह वितरण कार्य में सक्रिय हैं।
इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

यह पहल न केवल महिलाओं को स्थानीय रोजगार दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और सम्मान भी दिला रही है।


महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी

आज सूरजपुर की महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में भी आगे बढ़ रही हैं।
यह मॉडल साबित करता है कि जब अवसर और भरोसा मिलता है, तो महिलाएं पूरे समाज को सशक्त बना सकती हैं।

यह पहल निश्चित रूप से जिले के पोषण स्तर को बेहतर बनाएगी और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करेगी।

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