रायपुर।
Chhattisgarh High Court Cattle Transport Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पशु परिवहन को लेकर एक महत्वपूर्ण और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। महासमुंद जिले में जब्त की गई 15 भैंसों (3 मादा और 12 नर) को लेकर अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि पशुओं को वध के उद्देश्य से नहीं ले जाया जा रहा है, तो उनकी ढुलाई अपने आप में अपराध नहीं है।

इस फैसले के बाद अब ये भैंसे अपने असली मालिकों के पास लौट सकेंगी, जो इन्हें अपनी आजीविका का एकमात्र साधन बता रहे थे।


⚖️ क्या था पूरा मामला?

मामले की शुरुआत 12 सितंबर 2025 को हुई, जब पुलिस ने एक मुखबिर की सूचना पर महासमुंद जिले में
➡️ 15 भैंसों को पैदल ले जाते हुए जब्त किया।
पुलिस को शक था कि इन्हें वधशाला (स्लॉटरहाउस) की ओर ले जाया जा रहा है।

इसके बाद तीन लोगों को
छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की

  • धारा 4
  • धारा 6
  • धारा 10

के तहत आरोपी बनाया गया।


👨‍🌾 मालिकों की दलील: यही हमारी रोज़ी-रोटी है

तीनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में बताया कि वे
✔️ छोटे किसान
✔️ डेयरी व्यवसाय से जुड़े
हैं और जब्त की गई भैंसें ही उनकी एकमात्र आय का स्रोत हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पशुओं को वध के लिए नहीं, बल्कि कृषि और डेयरी कार्यों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था।


🧑‍⚖️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“वध के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से कृषि पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना इस अधिनियम के तहत अपराध नहीं है।”

अदालत ने यह भी कहा कि

  • अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि भैंसों को वध के लिए ले जाया जा रहा था
  • किसी भी दस्तावेज़ में वध स्थल का उल्लेख नहीं है
  • पशु स्वास्थ्य प्रमाणपत्र में सभी 15 भैंसों को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया है

📜 कानून की व्याख्या में क्या कहा कोर्ट ने?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया:

  • धारा 6 केवल वध के लिए पशु परिवहन पर रोक लगाती है
  • धारा 6(3) तभी लागू होगी जब वध का उद्देश्य स्पष्ट हो
  • केवल पशुओं की ढुलाई से अपराध सिद्ध नहीं होता

अदालत ने यह भी जोड़ा कि:

“भैंसों को गौशाला में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। बेहतर है कि इन्हें उनके मालिकों को सौंपा जाए, ताकि वे कृषि कार्य में इनका उपयोग कर सकें।”


🐃 जिला अदालत को दिया गया निर्देश

हाईकोर्ट ने जिला अदालत को आदेश दिया कि
➡️ 15 भैंसों को तुरंत पुलिस अभिरक्षा से मुक्त कर
➡️ उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा जाए।

साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भविष्य में अपने पक्ष में सभी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया है।


Chhattisgarh High Court Cattle Transport Ruling न केवल किसानों और डेयरी संचालकों के लिए राहत भरा है, बल्कि यह साफ संदेश भी देता है कि कानून की मंशा को बिना ठोस सबूत के गलत तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। यह फैसला पशु परिवहन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन साबित होगा।

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