बिलासपुर, 22 जनवरी 2026।

Chhattisgarh High Court के तहत शिक्षा और बच्चों के हित से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कड़े और संतुलित फैसले दिए हैं। एक ओर जहां मिड-डे मील से बच्चों के बीमार होने के मामले में प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया गया, वहीं दूसरी ओर फर्जी दस्तावेज प्रकरण में बर्खास्त शिक्षक को अंतरिम राहत भी प्रदान की गई है।


🔴 मिड-डे मील मामला: हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मांगा जवाब

बिलासपुर जिले में मिड-डे मील का दूषित भोजन खाने से 25 बच्चों के बीमार होने की गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव से विस्तृत जवाब तलब किया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों को परोसा गया भोजन स्वास्थ्य मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके चलते तीन शिक्षकों को निलंबित किया गया।

👉 प्रभावित 25 बच्चों के परिजनों को 5-5 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया, जिसका वितरण 19 जनवरी 2026 को किया गया।


🟢 सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने के निर्देश

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्कूलों में सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि:

  • मिड-डे मील वितरण स्थल बच्चों के अनुकूल और स्वच्छ होना चाहिए
  • भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा की नियमित निगरानी की जाए

इस निर्णय से स्पष्ट है कि न्यायालय बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।


⚖️ फर्जी दस्तावेज मामला: शिक्षक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

दूसरी ओर, फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप में बर्खास्त शिक्षक ईश्वरी निर्मलकर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है।

ईश्वरी निर्मलकर सहित छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।


📌 नियुक्ति और सेवा का विवरण

  • वर्ष 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के रूप में नियुक्ति
  • 2009 में सेवा नियमित
  • 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में एब्जॉर्प्शन
  • 2023 में प्राइमरी स्कूल हेडमास्टर पद पर पदोन्नति

हालांकि उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन ट्रायल अभी लंबित है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी, धमतरी द्वारा 6 जनवरी 2026 को बर्खास्तगी आदेश जारी किया गया था, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी।


🔍 न्यायालय की संतुलित भूमिका

इन दोनों मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख यह दर्शाता है कि:

  • जहां बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा
  • वहीं कर्मचारियों के कानूनी अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया का भी संरक्षण किया जाएगा

यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करता है।


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