Chhattisgarh Widow Assault Case: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। पेंड्रा थाना क्षेत्र के खोडरी चौकी अंतर्गत ग्राम रानीझाप में एक विधवा महिला के साथ न सिर्फ बेरहमी की गई, बल्कि उसे सामाजिक रूप से अपमानित करने की सारी हदें पार कर दी गईं।


🚨 अमानवीय सजा, शर्मनाक वीडियो आया सामने

आरोप है कि महिला को अवैध संबंध के शक में पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर उसकी साड़ी उतारकर अर्धनग्न हालत में पूरे गांव में घुमाया गया। यही नहीं, आरोपियों ने उसके चेहरे पर गोबर पोत दिया। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है।


❤️‍🩹 प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, पीड़िता करीब 35 वर्ष की विधवा महिला है, जिसके पति की मौत लगभग एक साल पहले हो चुकी थी। इसके बाद उसका गांव के ही हरि प्रसाद राठौर नामक विवाहित व्यक्ति से प्रेम संबंध था।

हरि प्रसाद की पत्नी और परिवार को जब इस संबंध की जानकारी हुई, तो विवाद बढ़ता चला गया। दोनों 29 अक्टूबर 2025 को गांव छोड़कर मध्य प्रदेश के शहडोल जिले चले गए थे और हाल ही में वापस लौटे थे।


🏠 पुलिस चौकी से लौटने के बाद भड़की हिंसा

23 जनवरी को दोनों गांव लौटे और खोडरी चौकी में समझाइश के बाद वापस भेजे गए। लेकिन अगले ही दिन सुबह, हरि प्रसाद की पत्नी सरोज राठौर, उसका भाई मनोज राठौर और बहन यशोदा राठौर अन्य लोगों के साथ महिला के पास पहुंचे।

आरोप है कि महिला को घर से घसीटकर बाहर निकाला गया, बीच सड़क पर पीटा गया और गांव के मुख्य मार्ग से काली मंदिर तक अपमानित करते हुए ले जाया गया। इस दौरान आरोपी कहते रहे— “घर उजाड़ने की सजा यही है।”


👥 ग्रामीणों ने बचाई महिला की जान

महिला की चीख-पुकार सुनकर अमर सिंह धुर्वे, दशरथ विश्वकर्मा सहित कई ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कर महिला को आरोपियों से छुड़ाया। इसके बाद महिला को कपड़े पहनाए गए और पुलिस को सूचना दी गई।


⚖️ पुलिस कार्रवाई, तीन आरोपी नामजद

गौरेला थाना प्रभारी सौरभ सिंह ने बताया कि महिला की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपियों को जमानत पर रिहा किया गया है, लेकिन मामला सेंसिटिव मोड में रखते हुए गहन जांच जारी है।


🔍 समाज पर बड़ा सवाल

Chhattisgarh Widow Assault Case ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज भी ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को अपने फैसले लेने की आज़ादी नहीं है? कानून और संविधान जहां समानता की बात करते हैं, वहीं ऐसी घटनाएं सामाजिक सोच पर गहरा सवाल छोड़ जाती हैं।

यह मामला सिर्फ एक महिला पर अत्याचार नहीं, बल्कि मानव गरिमा और कानून व्यवस्था की कड़ी परीक्षा भी है।

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