Sahitya Utsav 2026 Dr Ambedkar Vicharpunj:
साहित्य उत्सव 2026 “आदि से अनादि तक” के द्वितीय दिवस के पंचम सत्र में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के समग्र विचारों पर गहन मंथन देखने को मिला। नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन के लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित इस सत्र में “डॉ. अम्बेडकर विचारपुंज की आभा” विषय पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात चिंतक डॉ. राजकुमार फलवारिया उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।


🧠 केवल दलित नेता नहीं, सम्पूर्ण समाज के मार्गदर्शक

अपने वक्तव्य में डॉ. राजकुमार फलवारिया ने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर को केवल दलितों का नेता मानने की धारणा अधूरी और सीमित सोच का परिणाम है।
उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं, तथ्यों और बाबासाहेब के विचारों के माध्यम से स्पष्ट किया कि डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण समाज के नेता, महान चिंतक और युगद्रष्टा मार्गदर्शक थे।

डॉ. फलवारिया ने कहा कि बाबासाहेब का चिंतन जाति या वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित था।


📚 बहुआयामी व्यक्तित्व थे बाबासाहेब

डॉ. फलवारिया ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर केवल सामाजिक न्याय के प्रतीक ही नहीं थे, बल्कि वे
महान अर्थशास्त्री, लेखक, बैरिस्टर, शिक्षक, पत्रकार, संपादक, स्तंभकार, श्रम मंत्री और कानून मंत्री के रूप में एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे।

उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, श्रमिकों के हितों, आर्थिक नीतियों, कृषि एवं औद्योगिक विकास, नदी जल प्रबंधन और भारतीय संविधान के निर्माण जैसे विषयों पर कार्य करते हुए सम्पूर्ण समाज को केंद्र में रखा।


⚖️ आज भी प्रासंगिक है अम्बेडकर चिंतन

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर का चिंतन आज भी
सामाजिक समरसता, लोकतंत्र, समानता और संवैधानिक मूल्यों के लिए पथप्रदर्शक है।
उनके विचार वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के समाधान की दिशा दिखाते हैं।


🎯 कार्यक्रम का उद्देश्य

इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य डॉ. अम्बेडकर के समग्र और व्यापक विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना रहा।
साथ ही, उन्हें केवल एक वर्ग या समुदाय तक सीमित करने की मानसिकता पर पुनर्विचार करने का संदेश भी दिया गया।


Sahitya Utsav 2026 Dr Ambedkar Vicharpunj सत्र ने यह स्पष्ट किया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल इतिहास पुरुष नहीं, बल्कि आज और आने वाले समय के लिए भी लोकतंत्र और समानता के जीवंत विचारक हैं। उनका चिंतन आज भी समाज को सही दिशा देने की क्षमता रखता है।

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