रायपुर।

Maoist surrender appeal Chhattisgarh: “प्रिय बहन मासे, जो अब पार्टी में ‘क्रांति’ के नाम से जानी जाती हो… हथियार छोड़ दो और घर लौट आओ। हम सब तुम्हारी चिंता करते हैं।
यह कोई निजी फोन कॉल नहीं, बल्कि आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) से प्रसारित एक भावनात्मक संदेश है, जिसे सुकमा जिले के एक दूरस्थ गांव के निवासी अनिल कुरामी ने अपनी माओवादी बहन के लिए रिकॉर्ड कराया है।

इस अपील में जंगल के जीवन से बाहर घर, परिवार और पुनर्वास की उम्मीद झलकती है—एक ऐसा जीवन, जो हिंसा से दूर है।


रेडियो के ज़रिए माओवादियों तक पहुंचने की नई पहल

31 मार्च की केंद्र सरकार की समय-सीमा नजदीक आते ही, छत्तीसगढ़ सरकार ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटाने के लिए नई आउटरीच रणनीति शुरू की है।

इसके तहत:

  • माओवादी कैडरों के परिवारजनों की आवाज़
  • ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) पर
  • छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे LWE प्रभावित राज्यों में

प्रसारित की जा रही है।


क्यों चुना गया रेडियो माध्यम

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, बस्तर जैसे दुर्गम इलाकों में रेडियो आज भी सबसे भरोसेमंद माध्यम है।

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा:

“जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता, वहां रेडियो पहुंचता है। यह प्रचार नहीं, बल्कि घर से आई आवाज़ है।”

रेडियो प्रसारण:

  • 5 फरवरी से 25 फरवरी तक
  • दिन में दो बार
    • सुबह 9 से 10 बजे
    • शाम 5 से 6 बजे

किया जा रहा है—ताकि माओवादी कैडर मूवमेंट ब्रेक और शाम के समय संदेश सुन सकें।


गोंडी भाषा में भावनात्मक संदेश

रेडियो पर प्रसारित संदेश अधिकतर गोंडी भाषा में हैं, जिनमें कहा जा रहा है:

“सब लोग मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सरकार पुनर्वास दे रही है। तुम भी लौट आओ। घर पर जीवन बेहतर है।”

अधिकारियों का कहना है कि ये संदेश सार्वजनिक जरूर हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से बेहद निजी हैं।


क्यों बस्तर से शुरू हुई यह मुहिम

आंकड़ों के अनुसार:

  • देश के जंगलों में सक्रिय 85% से अधिक सशस्त्र माओवादी
  • बस्तर या छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से हैं

इसी वजह से यह अभियान बस्तर के परिवारों की आवाज़ से शुरू किया गया।


आगे और तेज होगा अभियान

सरकार ने:

  • सक्रिय माओवादी कैडरों की सूची
  • उनके परिजनों की पहचान

कर ली है। आने वाले दिनों में:

  • समुदाय प्रमुख
  • जनप्रतिनिधि
  • पत्रकार और अधिकारी

भी इस रेडियो अपील अभियान में शामिल किए जाएंगे।


केंद्र–राज्य समन्वय से हो रहा प्रसारण

यह पहल तब शुरू हुई, जब गृहमंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर सहयोग मांगा।

इसके बाद प्रसार भारती (आकाशवाणी) ने आदेश जारी कर संबंधित रेडियो केंद्रों को संदेश प्रसारित करने के निर्देश दिए।

प्रसारण केंद्रों में शामिल हैं:

  • छत्तीसगढ़: रायपुर, जगदलपुर, सारंगढ़
  • तेलंगाना: कोठागुडेम
  • आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम
  • महाराष्ट्र: चंद्रपुर, गढ़चिरौली
  • ओडिशा: भवानीपटना, बोलांगीर
  • मध्य प्रदेश: बालाघाट, मंडला

“हिंसा का समय खत्म हो चुका है”

गृहमंत्री विजय शर्मा ने अपील करते हुए कहा:

“किसी न किसी तरह सभी को लौटना होगा। हिंसा का समय खत्म हो चुका है। हथियार छोड़िए और अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जिएं।”

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