रिसाली।
शहर में इन दिनों Risali Pension Payment Issue चर्चा का विषय बना हुआ है। नवम्बर 2025 से पेंशन हितग्राहियों के खातों में राशि नहीं आने के कारण बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगजन परेशान हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए महापौर परिषद ने समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर शीघ्र राशि जारी करने की मांग की है।

महापौर शशि सिन्हा ने कहा कि पेंशन हितग्राहियों को महीनों से इंतजार करना पड़ रहा है। कई बुजुर्ग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी पेंशन पर निर्भर हैं। ऐसे में भुगतान में देरी चिंता का विषय है।


नवम्बर 2025 से नहीं आई पेंशन राशि

परिषद की बैठक में सदस्यों ने बताया कि Risali Pension Payment Issue के तहत नवंबर 2025 से पेंशन खातों में राशि नहीं पहुंची है। चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि विभाग से ही राशि का आवंटन नहीं हुआ है।

इस खुलासे के बाद महापौर परिषद ने मामले को गंभीरता से लिया और समाज कल्याण विभाग को तत्काल पत्र लिखने का निर्णय किया। परिषद ने स्पष्ट किया कि हितग्राहियों को समय पर पेंशन मिलना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।


किन योजनाओं के तहत मिलती है पेंशन?

केंद्रीय और राज्य शासन की पेंशन योजनाओं के तहत—

  • वृद्धा पेंशन
  • विधवा पेंशन
  • दिव्यांग पेंशन

इन सभी योजनाओं के अंतर्गत 500-500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है।

इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 49 वर्ष से कम आयु में विधवा होने पर 20 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए बीपीएल होना अनिवार्य है।


305 नए आवेदनों को मिली मंजूरी

बैठक के दौरान परिषद ने अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक प्राप्त 305 पात्र आवेदनों को अनुमोदित किया। इनमें—

  • 247 आवेदन केंद्रीय पेंशन योजना के
  • 58 आवेदन राज्य पेंशन योजना के

शामिल हैं।

हालांकि एक ओर Risali Pension Payment Issue से पुराने हितग्राही परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नए पात्र लोगों को मंजूरी मिलना राहत की बात है।


जनहित में त्वरित कार्रवाई की मांग

बैठक में महापौर शशि सिन्हा, एमआईसी सदस्य संजू नेताम, जहीर अब्बास, अनिल देशमुख, रोहित धनकर, आयुक्त मोनिका वर्मा, कार्यपालन अभियंता सुनील दुबे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

परिषद ने सर्वसम्मति से मांग की कि विभाग शीघ्र आवंटन जारी करे, ताकि बुजुर्गों और जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

स्पष्ट है कि Risali Pension Payment Issue केवल प्रशासनिक देरी का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा विषय है। अब निगाहें समाज कल्याण विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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