Women Child Rights Workshop के जरिए दुर्ग में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर गंभीर चर्चा हुई। 26 फरवरी को प्रेरणा सभागार में जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की। इस आयोजन में समाजसेवी संस्था हंसराज नवयुवक मंडल के प्रतिनिधि जयवर्धन गजभिए ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने न केवल अपने विचार रखे, बल्कि आने वाले समय में दुर्ग में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाने का आव्हान भी किया। माहौल गंभीर था, लेकिन उम्मीद से भरा हुआ था।


Women Child Rights Workshop में उठे अहम मुद्दे

Women Child Rights Workshop में महिलाओं और बच्चों के कानूनी अधिकारों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट था। किसी भी महिला या बच्चे के साथ अन्याय न हो। उनके अधिकारों का हनन न हो।

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जयवर्धन गजभिए ने कार्यशाला में कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि महिलाएं अपने अधिकार जानेंगी, तो वे अन्याय का सामना कर सकेंगी। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से निवेदन किया कि दुर्ग में नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

उन्होंने बढ़ती वैश्यावृत्ति पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाओं को कानूनी नियमों की जानकारी दी जाए। उन्हें संगठित किया जाए। ताकि वे शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकें।

कार्यशाला में सवाल-जवाब और सुझावों का आदान-प्रदान हुआ। सभी अधिकारी और उपस्थित आगंतुक गजभिए के विचारों से प्रभावित हुए।

महिला एवं बाल विकास से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है


प्रेरणा सभागार में जागरूकता का प्रयास

महिला एवं बाल विकास विभाग समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इनका मकसद समाज में कानूनी समझ बढ़ाना है।

दुर्ग के प्रेरणा सभागार में आयोजित यह कार्यशाला भी इसी दिशा में एक कदम था। जिले में महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दे संवेदनशील माने जाते हैं। इसलिए विभाग ने विशेषज्ञों और सामाजिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।

हंसराज नवयुवक मंडल लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। ऐसे में उनके प्रतिनिधि की सहभागिता महत्वपूर्ण मानी गई। जयवर्धन गजभिए ने स्पष्ट कहा कि जागरूकता कार्यक्रम गांव और वार्ड स्तर तक ले जाने होंगे। तभी वास्तविक बदलाव संभव होगा।


Women Child Rights Workshop

  • 26 फरवरी को प्रेरणा सभागार, दुर्ग में आयोजन।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग ने किया आयोजन।
  • जयवर्धन गजभिए ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
  • महिलाओं को कानूनी नियमों की जानकारी देने का प्रस्ताव।
  • वैश्यावृत्ति रोकने और संगठित प्रयास पर जोर।

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

Women Child Rights Workshop के बाद उपस्थित अधिकारियों और अतिथियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे समय की जरूरत बताया।

कार्यशाला में उठे मुद्दों ने यह संकेत दिया कि समाज में जागरूकता अभी भी जरूरी है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में।

जयवर्धन गजभिए के सुझावों को अधिकारियों ने गंभीरता से सुना। विभाग ने भविष्य में ऐसे कार्यक्रम बढ़ाने के संकेत दिए।

इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि जब प्रशासन और समाज साथ आते हैं, तब बदलाव की शुरुआत होती है।


निष्कर्ष

दुर्ग में आयोजित Women Child Rights Workshop केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था। यह एक सामाजिक संदेश था। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। जयवर्धन गजभिए के सुझावों ने इस पहल को नई दिशा दी। उम्मीद है कि Women Child Rights Workshop जैसे प्रयास आगे भी समाज में जागरूकता और सशक्तिकरण की रोशनी फैलाते रहेंगे।

3 responses to “Women Child Rights Workshop: दुर्ग में 1 सशक्त पहल, सकारात्मक संदेश”

  1. Jayvardhan Gajbhiye Avatar
    Jayvardhan Gajbhiye

    बहुत बहुत धन्यवाद।.
    👏👏👏.

    1. आपका समर्थन हमारे लिए बहुत मायने रखता है। हमेशा ऐसे ही साथ देते रहिए। 🙏

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