Opium Farming Case ने छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक हलकों में बड़ी हलचल मचा दी है। अवैध अफ़ीम की खेती का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।

दुर्ग जिले में विनायक ताम्रकार और उसके भाइयों से जुड़े अवैध कब्जों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्टेट हाईवे पर स्थित लगभग 32.5 डिसमिल जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोज़र चलाया। इसके साथ ही पूरे गांव की सरकारी जमीनों का सीमांकन भी शुरू कर दिया गया है। वर्षों से दबंगई झेल रहे ग्रामीणों में अब राहत की भावना दिखाई दे रही है।


Opium Farming Case: प्रशासन का बड़ा अभियान, कब्जों पर बुलडोजर

छत्तीसगढ़ में सामने आए Opium Farming Case के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दुर्ग जिले में ताम्रकार परिवार के अवैध कब्जों को हटाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

मंगलवार को प्रशासनिक टीम ने स्टेट हाईवे के पास स्थित करीब 32.5 डिसमिल जमीन से कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रही।

अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में अन्य अवैध कब्जों की भी जांच होगी।

गांव के लोगों ने बताया कि ताम्रकार परिवार ने कई वर्षों से सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था। इससे ग्रामीणों की आवाजाही और विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस परिवार की दबंगई के कारण लोग खुलकर शिकायत भी नहीं कर पाते थे। लेकिन अब प्रशासन की कार्रवाई से उन्हें राहत मिली है।

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भारत में अफ़ीम खेती से जुड़े कानूनों के बारे में जानकारी:
https://en.wikipedia.org/wiki/Opium


सेंसर कैमरे और करंट वाले तारों से घिरा फार्म हाउस

जांच में Opium Farming Case से जुड़ी कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि विनायक ताम्रकार का करीब 110 एकड़ का फार्म हाउस है।

इस फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। रास्ते में कई जगह सेंसर वाले कैमरे लगाए गए थे। किसी भी हलचल पर ये कैमरे आवाज करने लगते थे।

फार्म हाउस के अंतिम हिस्से में स्थित शिवनाथ नदी किनारे की 11 एकड़ जमीन करंट वाले तारों से घिरी हुई मिली।

यह जमीन प्रीतिबाला और मधुबाला के नाम दर्ज बताई जा रही है। पूछताछ में उन्होंने कहा कि वे वर्षों से दूसरे शहर में रहती हैं। खेतों की देखभाल विनायक ताम्रकार करता था।

इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के घर से अफ़ीम, बीज और कई उपकरण भी बरामद किए हैं।

भारत में मादक पदार्थ नियंत्रण से जुड़ी जानकारी:
https://narcoticsindia.nic.in


Key Facts about Opium Farming Case

  • दुर्ग जिले में अवैध अफ़ीम खेती का मामला सामने आया।
  • प्रशासन ने 32.5 डिसमिल जमीन से अवैध कब्जा हटाया
  • जांच में 110 एकड़ फार्म हाउस और हाई सिक्योरिटी व्यवस्था सामने आई।
  • पुलिस ने अफ़ीम, बीज और उपकरण बरामद किए।
  • दो मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

प्रतिक्रियाएं

Opium Farming Case के सामने आने के बाद गांव के लोगों में राहत और उम्मीद दोनों दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से ताम्रकार परिवार की दबंगई के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने बताया कि मुक्तिधाम जाने के लिए भी पहले अनुमति लेनी पड़ती थी। कई बार रास्ते पर ताला लगा दिया जाता था।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के चरागाह और खेल मैदान पर भी कब्जा कर लिया गया था। यहां तक कि शिवनाथ नदी जाने का रास्ता भी बंद कर दिया गया था

अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद लोगों को उम्मीद है कि गांव की सरकारी जमीनें कब्जामुक्त होंगी और विकास कार्य फिर से शुरू होंगे।


Opium Farming Case

कुल मिलाकर Opium Farming Case ने छत्तीसगढ़ में अवैध खेती और जमीन कब्जे के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है।

प्रशासन ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई शुरू की है और अवैध कब्जों को हटाने का अभियान जारी है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि यदि यह कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान हो सकेगा। साथ ही Opium Farming Case में दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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