chhattisgarh राशन शक्कर वितरण की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। प्रदेश में उचित मूल्य की राशन दुकानों पर शक्कर की आपूर्ति बाधित होने से लाखों हितग्राही परेशान हैं। एक ओर उत्पादन में भारी कमी है, तो दूसरी ओर सॉफ्टवेयर की खामियों के चलते पात्र कार्डधारकों की आईडी में भी शक्कर शो नहीं हो रही। इस पूरे मामले की जड़ें राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों के संकट तक जाती हैं, जो पिछले तीन साल में 267 करोड़ 40 लाख रुपए के घाटे में डूब चुके हैं।


मुख्य समस्या: राशन दुकानों पर शक्कर का संकट

chhattisgarh के राशन हितग्राहियों को लंबे समय से शक्कर नहीं मिल पा रही है। समस्या केवल आपूर्ति की नहीं है — अब तकनीकी खामियाँ भी इसमें जुड़ गई हैं।

कई पात्र कार्डधारक जब राशन दुकान पर शक्कर लेने पहुँचते हैं, तो दुकानदार के ऐप में उनकी आईडी में शक्कर का कोई विकल्प नजर नहीं आता। इससे हितग्राहियों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

बार-बार उचित मूल्य की दुकानों के संचालकों की ओर से खाद्य विभाग में इसकी शिकायत की जा रही है, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान अभी तक सामने नहीं आया है।

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सॉफ्टवेयर फॉल्ट से हितग्राही परेशान — 2 चौंकाने वाले केस

केस-1: आईडी में सिर्फ नमक, शक्कर गायब

कार्डधारक नंबर: 223876064083 शक्कर लेने के लिए अपनी नजदीकी राशन दुकान पहुँचा।

जैसे ही दुकानदार ने उसकी आईडी को ऐप में डाला, स्क्रीन पर सिर्फ नमक शो हुआ — शक्कर का कोई उल्लेख नहीं था। जबकि यह कार्डधारक नियमित रूप से उसी दुकान से हर बार शक्कर प्राप्त करता आया है।


केस-2: वार्ड विपिन बिहारी में भी यही हाल

वार्ड विपिन बिहारी निवासी कार्डधारक नंबर: 223875385733, लक्ष्मी दुकानदार के पास शक्कर लेने पहुँची।

दुकानदार ने जैसे ही उनकी आईडी से शक्कर चेक किया — वहाँ भी शक्कर शो नहीं हुई। इस कारण महिला को बिना शक्कर के वापस जाना पड़ा। यह मामला chhattisgarh राशन शक्कर वितरण व्यवस्था में गहरी खामी को उजागर करता है।


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उत्पादन लक्ष्य से 95% पीछे — जानिए असली कारण

वर्ष 2025-26 में chhattisgarh के शक्कर कारखानों के लिए 12 लाख 64 हजार मीट्रिक टन शक्कर उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

लेकिन इस विशाल लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल लगभग 60 हजार मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन ही हो सका है।

यानी लक्ष्य का मात्र एक छोटा-सा अंश ही पूरा हो पाया है। इस भारी उत्पादन घाटे ने पूरी वितरण प्रणाली को चरमरा दिया है और chhattisgarh राशन शक्कर की समस्या को और गहरा कर दिया है।


60% से अधिक हितग्राहियों को नहीं मिली chhattisgarh राशन शक्कर

स्टोरेज की भयावह स्थिति

प्रदेश में पंजीकृत कार्डधारकों के कोटे के अनुसार 40 प्रतिशत से भी कम शक्कर का भंडारण राशन दुकानों में हो पाया है।

इसका सीधा असर यह हुआ है कि 60 प्रतिशत से अधिक हितग्राहियों को अभी तक शक्कर का वितरण नहीं हो पाया है।

मार्च का आवंटन और जमीनी हकीकत

नागरिक आपूर्ति निगम, रायपुर के अधिकारियों के अनुसार मार्च में जो आवंटन हुआ था, उसके अनुसार दुकानों में शक्कर का भंडारण कराया जा चुका है।

लेकिन अधिकारी खुद मानते हैं कि इस बार कारखानों से शक्कर की बहुत कम मात्रा में आपूर्ति हुई है, जिसके कारण मांग की पूर्ति संभव नहीं हो पाई।


शक्कर कारखाना 267 करोड़ के घाटे में — हर साल 89 करोड़ की हानि

सहकारी कारखानों की दयनीय स्थिति

यह समस्या सिर्फ वितरण की नहीं, बल्कि उत्पादन ढाँचे की जड़ों तक फैली है। छत्तीसगढ़ में संचालित सहकारी शक्कर कारखाने भारी घाटे में चल रहे हैं।

विभागीय आँकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में इन कारखानों के संचालन में शासन को 267 करोड़ 40 लाख रुपए का घाटा हुआ है।

प्रतिवर्ष 89 करोड़ की हानि

यदि औसत निकाला जाए, तो हर साल इन कारखानों से 89 करोड़ रुपए की हानि हो रही है।

यानी उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन न तो पर्याप्त मात्रा में और न ही मुनाफे के साथ। यह सरकारी संसाधनों की बर्बादी और chhattisgarh राशन शक्कर वितरण प्रणाली की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।


खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम का क्या है कहना?

खाद्य विभाग का जवाब

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि सॉफ्टवेयर में कुछ फॉल्ट के कारण कार्डधारकों की आईडी में शक्कर शो नहीं हो पा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसमें सुधार किया जाएगा और हितग्राहियों को शक्कर वितरित की जाएगी।

नागरिक आपूर्ति निगम का पक्ष

नागरिक आपूर्ति निगम, रायपुर का कहना है कि कारखानों से जैसे-जैसे शक्कर का भंडारण उनके पास होता है, वैसे-वैसे मांग के अनुसार राशन दुकानों में भंडारण कराया जाता है।

लेकिन सवाल यह है कि जब कारखाने ही लक्ष्य का एक छोटा अंश भी पूरा नहीं कर पा रहे, तो वितरण कैसे होगा?


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निष्कर्ष

chhattisgarh राशन शक्कर वितरण की यह समस्या अब बहुआयामी संकट बन चुकी है। एक ओर शक्कर कारखाने उत्पादन लक्ष्य से कोसों दूर हैं, दूसरी ओर सॉफ्टवेयर फॉल्ट जैसी तकनीकी खामियाँ पात्र हितग्राहियों को उनका हक दिलाने में बाधा बन रही हैं। 267 करोड़ रुपए के घाटे में चल रहे कारखाने और 60% से अधिक हितग्राहियों तक न पहुँचने वाली शक्कर — ये दोनों तथ्य यह साफ बताते हैं कि व्यवस्था में जड़ से सुधार की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह न केवल सॉफ्टवेयर फॉल्ट ठीक करे, बल्कि कारखानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घाटे को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए — ताकि हर पात्र परिवार को उसका हक मिल सके।

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