Raipur में आयोजित जन संस्कृति मंच के राज्य सम्मेलन ने इस बार वैचारिक बहस को एक नई दिशा दी। राजधानी के वृंदावन हॉल में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हुए।

यह सम्मेलन न केवल सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा का मंच भी बना।


मुख्य अतिथि के तीखे विचार

सम्मेलन में मुख्य अतिथि प्रखर वक्ता रामजी राय ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय हमेशा आज्ञाकारिता से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तानाशाही और सामंती व्यवस्थाएं हमेशा लोगों को आज्ञाकारी बनाना चाहती हैं।

उनके अनुसार, विवेक और सवाल करने की क्षमता ही एक सच्चे बुद्धिजीवी की पहचान है। उन्होंने समाज में जागरूकता और प्रतिरोध की आवश्यकता पर जोर दिया।

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Raipur: लोकतंत्र और फासीवाद पर बहस

Raipur में आयोजित इस सम्मेलन में आलोचक सियाराम शर्मा ने वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है।

जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने भी कहा कि फासीवाद लोकतंत्र के स्तंभों को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। वहीं प्रेमशंकर और अरुणकांत शुक्ला ने भी इसी मुद्दे पर चिंता व्यक्त की।


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सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रस्तुतियां

Raipur के इस सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। कवियों ने विचारोत्तेजक कविताएं प्रस्तुत कीं, जिनमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

इसके अलावा:

  • करमा लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति
  • इंडियन रोलर बैंड के जागरूक गीत
  • नाटक “आओ अब लौट चलें” का मंचन

इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और प्रभावशाली बना दिया।


Raipur: संगठन का गठन और फैसले

Raipur में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान जन संस्कृति मंच की पहली छत्तीसगढ़ राज्य इकाई का गठन किया गया। सर्वसम्मति से रूपेंद्र तिवारी को अध्यक्ष और राजकुमार सोनी को सचिव चुना गया।

सांगठनिक सत्र में विभिन्न इकाइयों की समीक्षा की गई और संगठन को मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए गए।


बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों की भागीदारी

Raipur में इस सम्मेलन में कई प्रमुख साहित्यकार, रंगकर्मी और कलाकार शामिल हुए। कार्यक्रम में कविताओं, जनगीतों और नाटकों के माध्यम से सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया गया।

इसके साथ ही कविता पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।


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अंत में, Raipur में आयोजित यह राज्य सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक और वैचारिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। Raipur के इस आयोजन ने यह दिखाया कि संस्कृति और विचारधारा के माध्यम से समाज में जागरूकता लाई जा सकती है।

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