Durg University Registrar Controversy एक बार फिर चर्चा में है। दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को लेकर सरकारी वाहन के उपयोग और मरम्मत खर्च के भुगतान से जुड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी विवाद में क्षतिग्रस्त हुई कार की मरम्मत का खर्च विश्वविद्यालय के खाते से लिया गया।

मामला फिलहाल जांच और स्पष्टीकरण के दायरे में है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी इस पूरे प्रकरण की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है।

Durg University Registrar Controversy क्या है?

सूत्रों के अनुसार दुर्ग विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के उपयोग के लिए Etios कार क्रमांक CG 02 6681 उपलब्ध कराई गई थी।

आरोप है कि इस वाहन को हुए नुकसान के संबंध में वाहन प्रकोष्ठ के माध्यम से नोटशीट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि रायपुर नाका स्थित वाई ब्रिज के पास गति अवरोधक पर वाहन के ब्रेक लगाने के दौरान पीछे से आ रही दूसरी कार ने टक्कर मार दी थी।

हालांकि बाद में इस घटना को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे।

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सरकारी कार की मरम्मत पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वाहन को हुए नुकसान की वास्तविक वजह क्या थी।

सूत्रों का दावा है कि वाहन को सामान्य सड़क दुर्घटना में नहीं बल्कि एक कथित निजी विवाद के दौरान नुकसान पहुंचा था।

बताया जा रहा है कि 17 फरवरी 2026 को कुलसचिव रायपुर में आयोजित एक शिक्षा कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इसके बाद भिलाई में एक परिचित के घर रुकने को लेकर विवाद की स्थिति बनी।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी किया गया है।

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Durg University Registrar Controversy में एफआईआर और बीमा क्लेम पर सवाल

मामले से जुड़ी फाइल कुलपति के समक्ष पहुंचने पर कथित रूप से दुर्घटना की एफआईआर दर्ज कराने और बीमा क्लेम लेने की टिप्पणी की गई थी।

लेकिन आरोप है कि न तो एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी की गई।

यही कारण है कि अब पूरे मामले में प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी वाहन की दुर्घटना होने पर सामान्यतः एफआईआर और बीमा प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

24 हजार रुपये आहरण को लेकर जांच

सूत्रों के अनुसार कुलसचिव ने वाहन प्रकोष्ठ के माध्यम से मरम्मत कराने के बजाय स्वयं वाहन की मरम्मत करवाई।

इसके बाद मरम्मत का बिल प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय के खाते से लगभग 24 हजार रुपये का भुगतान प्राप्त किए जाने का आरोप है।

बताया जा रहा है कि कुलपति ने अब वित्त विभाग से बिना प्रशासकीय स्वीकृति के इस भुगतान के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है।

इस कार्रवाई के बाद मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है।

कुलसचिव को कार आवंटन पर भी विवाद

Durg University Registrar Controversy केवल मरम्मत खर्च तक सीमित नहीं है।

सूत्रों का दावा है कि विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार कुलसचिव को स्थायी रूप से अलग वाहन आवंटित किए जाने का प्रावधान नहीं है।

नियमों के अनुसार कुलसचिव को पूल कार सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, जिसका उपयोग कार्यालयीय आवश्यकता और आवागमन के लिए किया जाता है।

ऐसे में वाहन आवंटन की प्रक्रिया भी जांच का विषय बनती दिखाई दे रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई

मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने वित्तीय भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

कुलपति द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन मरम्मत, भुगतान और वाहन आवंटन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से अंतिम जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

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Durg University Registrar Controversy ने दुर्ग विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रक्रियाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी वाहन की मरम्मत, एफआईआर नहीं होने, बीमा क्लेम न लेने और 24 हजार रुपये के भुगतान को लेकर उठे आरोपों की जांच जारी है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच प्रक्रिया पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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