Tree Plantation Campaign के तहत छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के लुगे गांव स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक अनोखे और प्रेरणादायक अंदाज में की गई। स्कूल प्रवेशोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों को केवल स्वागत ही नहीं किया गया, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया।

“पेड़ लगाबो, तबे तो फल खाबो” अभियान के तहत सामाजिक कार्यकर्ता दंपत्ति तुमनचंद साहू और रंजिता साहू ने विद्यालय के सभी छात्रों को अमरूद और जामुन के फल वितरित किए। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना था।

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Tree Plantation Campaign के साथ स्कूल प्रवेशोत्सव बना खास

नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों को फल वितरण के साथ यह संदेश दिया गया कि यदि आज पेड़ लगाए जाएंगे और उनकी देखभाल की जाएगी, तभी आने वाली पीढ़ियां पौष्टिक फल और स्वच्छ पर्यावरण का लाभ उठा सकेंगी।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा और अभियान में सक्रिय भागीदारी दिखाई।

छात्रों को बांटे गए अमरूद और जामुन

सामाजिक कार्यकर्ता दंपत्ति ने सभी विद्यार्थियों को अमरूद और जामुन के फल वितरित किए। फल वितरण के साथ बच्चों को यह भी बताया गया कि पेड़ केवल फल ही नहीं देते, बल्कि स्वच्छ हवा, छाया और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विद्यार्थियों ने भी इस संदेश को गंभीरता से स्वीकार किया और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया।

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Tree Plantation Campaign का अनोखा संदेश

इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि बच्चों को फल खाने के बाद उनके बीजों को फेंकने से मना किया गया।

इसके बजाय विद्यार्थियों ने निर्णय लिया कि वे जामुन की गुठलियों और बीजों को सड़क किनारे, तालाबों के आसपास, नदी तटों और खाली स्थानों पर बिखेरेंगे ताकि भविष्य में वहां नए पौधे उग सकें।

“आम के आम, गुठलियों के दाम” की सीख

यह पहल प्रसिद्ध कहावत “आम के आम, गुठलियों के दाम” की तर्ज पर आधारित रही। छात्रों ने फल का आनंद भी लिया और बीजों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी अपनाया।

इस गतिविधि ने बच्चों को यह सिखाया कि छोटे-छोटे प्रयास भी प्रकृति संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

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Tree Plantation Campaign में बच्चों की महत्वपूर्ण भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए। यदि बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए, तो भविष्य में वे पर्यावरण के बेहतर संरक्षक बन सकते हैं।

इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से बताया गया कि पेड़ लगाने और उनकी रक्षा करने से समाज को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

पर्यावरण संरक्षण का बढ़ता महत्व

जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र के बीच वृक्षारोपण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

ऐसे में Tree Plantation Campaign जैसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने और लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

प्रधान पाठक ने बताया प्रेरणादायक पहल

विद्यालय के प्रधान पाठक नरेंद्र सिन्हा ने इस पहल को नए शैक्षणिक सत्र की आदर्श शुरुआत बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित करते हैं। इससे बच्चे केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि जीवन मूल्यों को भी सीखते हैं।

पर्यावरण और शिक्षा का अनूठा संगम

विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम का उदाहरण बना। छात्रों ने न केवल नई कक्षाओं में प्रवेश किया, बल्कि पर्यावरण बचाने का संकल्प भी लिया।

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Tree Plantation Campaign के माध्यम से धमतरी जिले के इस विद्यालय ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत छोटी-छोटी पहल से भी की जा सकती है। छात्रों को फल वितरित कर उनके बीजों से नए पेड़ उगाने का संकल्प दिलाना एक प्रेरणादायक प्रयास है। यदि ऐसे Tree Plantation Campaign पूरे प्रदेश में चलाए जाएं, तो हरित और स्वच्छ भविष्य की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

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